Tuesday, 4 November 2014





किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो, ले उधार
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम हैं
माना अपनी जेब से फकीर हैं
फिर भी यारो दिल के हम अमीर हैं
मिटे जो प्यार के लिये वो जिंदगी
जले बहार के लिये वो जिंदगी
किसी को हो ना हो हमें तो ऐतबार, जीना इसी का नाम हैं
रिश्ता दिल से, दिल के ऐतबार का
ज़िंदा हैं हम ही से नाम प्यार का
के मर के भी किसी को याद आयेंगे
किसी के आसुओं में मुस्कुरायेंगे
कहेगा फूल हर कली से बार बार, जीना इसी का नाम हैं
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गीतकार : शैलेन्द्र, गायक : मुकेश,
संगीतकार : शंकर जयकिशन, चित्रपट : अनाडी - 1959